आजीबाईचीशाला :हमारी दादी माँ पढाई करते हुए

आजीबाईचीशाला :हमारी दादी माँ पढाई करते हुए
गहरे गुलाबी साडी की यूनिफार्म मेँ सभी अपनी पढाई पूरी करने और लिखऩा पढना सीखने की ईच्छा लिये जब स्कूल आकर “आजीबाई” पढती है तो लगता है जीवन का कोई स्वप्न एसा नही जो साकार नही हो सकता है,
एक विद्यालय जो एसी ही एक वृद्ध महिला के पढने की अभिलाषा व्यक्त करने पर एक शिक्षक के हृदय को छू गया और इस अभिलाषा को प्रेरणा बनाकर वृद्ध महिलाओ के पढने की ईच्छा को साकार करने विद्यालय की कल्पना को साकार किया
स्थानीय किसान के घर के दो कमरोँ मेँ नीचे बैठकर पढने वाली ये वृद्ध महिलायेँ लिखना, पढना , हस्ताक्षर करना और अपनी मातृभाषा की लिपि को समझने का सफल प्रयास करती है,गणित, पहाडे और चित्रकला ये भी इनके विषय है,युवा शिक्षक और शिक्षिकायेँ उन्हे पढाते है,अक्षर ज्ञान ही नहीँ वरन कई विषयोँ को समझाने का प्रयास किया जाता है.सुनने और देखने मेँ आने वाली कठिनाईयाँ भी इनको लिखना पढना सीखने से रोक नही सकी .60 से 90 वर्ष की आयु की महिलायेँ यहाँ आकर अपनी पढाई पूरी कर रही है और अब जब वे बैक जाकर अँगुठे के निशान की जगह हाथोँ से हस्ताक्षर करती है तो उनका आत्मसम्मान उनके चेहरे की प्रसन्नता बनकर जाग जाता है,
मोतीराम दलाल ट्रस्ट की सहायता से एक कमरे की पाठशाला का निर्माऩ करने वाले योगेँद्र बाँगरे सर कहीँ से भी डोनेशन नही लेते है, वे अपनी आय से समाजकार्य करने मे लगे हुए है,
मोतीलाल दलाल ट्रस्ट की सहायता से ही अब और ब़डा विद्यालय बन गया है जिसनेँ पढऩे वाली एक वृद्ध महिला के बेटे ने भी इस पुनीत कीर्य के लये आर्थिक सहयोग दिया है,
आयु कोई बाध्यता नही है ,एसा इस विद्यालय को देखने से विश्वास बनता है,दिन के दो घँटे चलने वाला यह विद्यालय बहुत सुँदर है,शारदा वँदना से यह पाठशाला अपनी दिनचर्या शुरु करती है,यहाँ यूनिट टेस्ट भी होते है और होमवर्क भी दिया जाता है,

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