राजपूती सँस्कृति के लिये समर्पित राजपूत नृत्यांगना

खम्मा घणी
मै विपुल प्रहलाद सिँह राठौड जयपुर राजस्थान से ,आज आपके साथ अपने मन के भाव,अस्माकम् भारतम् के मँच से साझा करना चाहती हूँ,
मेरा मानना है कि ,जो नारी जीवन हमेँ मिला है उसमेँ अपने गुणोँ को समझते हुए हमे अपने आप पर सदैव विश्वास रखना चाहिये ,हर परिस्थिति मे ईश्वर प्रदत्त गुणोँ का सँवर्द्धन करते हुए हर परिस्थिति का सामना साहस से करते हुए अपने व्यक्तित्व का विकास करना चाहिये.
मेरी बडी बहनेँ जो यह मानती है कि शादी के बाद वो अपने सपनोँ को पूरा नही कर सकती है,मेरा उनसे कहना है कि ईश्वर प्रदत्त किसी भी गुण और प्रतिभा को केवल इसीलिये कि अब हम विवाहित है ,भूलना नही चाहिये,God Gift का सम्मान करते हुए जीवन मेँ आगे बढना चाहिये
मैँ बचपन से डाँस और साँस्कृतिक गतिविधियोँ मे भाग लेती आयी हूँ,और यह भगवान के द्वारा दिया गया उपहार है,शादी से पहले मेने कई प्रतियोगितायेँ जीती है, कई मँचोँ पर अपनी नृत्यकला का परिचय दिया है, Summer Classes मे नृत्य सीखाय़ा और शिक्षिका के रुप मेँ अपने विद्यार्थियोँ के साथ मँच पर कई बार नृत्य मेँ भाग लिया है,मेरी रुचि नृत्य और राजस्थानी लोक कलाओँ मेँ बहुत गहरी थी,
शादी के बाद जब परिवार की जिम्मेदारियाँ आयी तो थोडी परेशानी हुई मगर मेने उन सभी परिस्थितियोँ के साथ सामँजस्य बिठाया और हर चुनौति का सामना किया.
आज मैँ एक बच्चे की माँ हूँ,मेरे बच्चे का चेहरा मुझे आगे बढने को प्रेरित करता है और मेरे पति जो कि एक आदर्श जीवनसाथी है जिन्होने मेरा हर परिस्थिति मेँ साथ दिया और मुझे आगे बढने के लिये उत्साहित किया ,मै अपनी सारी सफलता का श्रेय उनको ही देना चाहुँगी,वे एक आदर्श जीवनसाथी है,
हम दोनोँ के सामने कई विपरित परिस्थितियाँ आयी पर हम दोनोँ ने एक दूसरे पर विश्वास करते हुए हर परिस्थिति का सामना किया और आज हम अपने सपनोँ को पूरा करने मे एक हद तक सफल भी हुए,जल्दी ही हमारा पहला राजस्थानी वीडियोँ “हिवडो रा हार” रीलीज होने वाला है
“हिवडोँ रा हार” राजस्थानी राजपूति सँस्कृति पर आधारित है, इसमेँ हमने गौरवशाली राजस्थानी सँस्कृति,,वेशभूषा और रँगबिरँगी उत्सव सँस्कृति को दर्शाने का प्रयास किया है,
राजस्थानी सँस्कृति मे कई उत्सव और त्यौहार मनाये जाते है
हम सभी जानते है कि अभी सावन का महीना चल रहा है,इसमे राजपूत महिलायेँ लहरिया पहनकर लहरिया सावन उत्सव मनाती है ,वर्तमान समय मेँ सावन लहरिया उत्सव अपनी पहचान खो रहा है, नयी पीढी के सँस्कृति विमुख होने और मैकाले की शिक्षा पद्धति का पालन करने की वजह से हम हमारी रँगबिरँगी सँस्कृति का आधार खोते जा रहे है,समाज मे परस्पर एक दूसरे से जोडने वाली रँग बिरँगी संस्कृति अपना गौरव खोती जा रही है,
हम इसी दिशा मे अपना प्रयास कर रहे है, जयपुर , जोधपूर , उदयपूर मे हम राजपूती महिलायेँ मिलकर राजपूती सँस्कृति और त्यौहारोँ पर आधारित Events का आयोजन करते है, नयी पीढी के सामने अपनी गौरवशाली परँपराओँ और मनभावनी सँस्कृति का परिचय रखते है,इन Events मे राजपूति रीति रिवाजोँ के मूल स्वरुप का समावेश किया जाता है,राजपूती सँस्कृति और राजस्थानी सभ्यता के वस्तविक गौरव को पुनर्जीवित करना और वामपँथियोँ द्वारा फैलाये गये भ्रमोँ को दूर करना .यह इन Events का उद्देश्य होता है
राजपुती महिलायेँ परस्पर मिलकर अपनी सँस्कृति के वास्तविक गौरवशाली स्वरुप को समाज के सामने लाने को दृढ प्रतिज्ञ है, परस्पर एक दूसरे की प्रतिभा को पहचानकर आत्मविश्वास बढाते हुए सँगठन के भाव से आगे बढना यही हमारा भाव है,महिला होना और राजपूत महिला होना ,अपने आप मेँ गौरव की बात है,
साँस्कृतिक सनाढ्यता के साथ अपने भीतर के साहस और आत्मसम्मान को जाग्रत रखना यही राजपूति आन बान और शान है,हमारा प्रयास है कि नयी पीढी राजपूति आन बान और शान का सही अर्थ समझ सके,
रंग बिरँगी सँस्कृति के बारे मेँ फैलायेँ गये भ्रामक तथ्योँ को दूर करना और अपने गौरवशाली इतिहास का स्मरण करके अपने आत्मसम्मान को जाग्रत करना,यही हमारे जीवन का अर्थ है,और इस हेतु हम हर सँभव प्रयास करेँगे,
लोक कला, राजस्थानी पोशाक और राजस्थानी आभूषण, इनमेँ से झाँकता हमारा सौँदर्य ,प्रकृति के रँग से रँगा लहरिया और प्रफुल्लत मन से साजन के लिये गाये जाने वाले सावन के गीत,ये हम मन को प्रसन्न कर देते है,
राजस्थानी लोक कला और सँगीत जीवन मे ऊर्जा ले आता है,प्रकृति के साथ जोडने वाली हमारी सँस्कृति मे मनुष्य होने का वास्तविक गौरव प्राप्त होता है,

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