सुषमा दीदी-मेरे आदर्श

सुषमा स्वराज जी को भाजपा महिला नेत्री की भावभीनी भावाँजलि
अगस्त माह ,आज जहाँ प्रसनन्ता का घ़डी थी वहीँ दूसरे ही दिन 6 अगस्त को यूँ अचानक हमारी सुषमा जी का सँसार से चले जाना,मन बहुत दुखी हुआ,
सुषमा जी (दीदी) को मेने जीया है,अपने बचपन मे नानाजी के घर “नई दुनिया” अखबार मेँ सुषमा जी के जीवन को पढा .उनके हर अँदाज और हर वक्तव्य को बहुत ध्यान से पढा करती थी,
जैसे वो सप्ताह के दिन के अनुसार साडियोँ के रँग चुनती थी,सोमवार को सफेद, मँगलवार को लाल, बुधवार को हरा,,,मेने जब से पढा,मैँ उसी दिन से उसी के अनुसार साडियाँ पहनने लगी,जो आज तक जारी है,उनके माथे पर लाल बिँदी और माँग मेँ कुमकुम से लँबी माँग भरना और बाल का जुडा मानोँ दिल मे एक जगह बसा ली थी,मेने अपने परिवेश मेँ उसे सम्मिलित कर दिया
सुषमा दीदी 25 वर्ष की उम्र मेँ राजनीति मेँ सक्रिय हुई ,उन्हीँ की प्रेरणा से मेने भी उसी वय मेँ राजनीति मेँ सक्रिय भाग लेना शुरु किया,आज मुझे लगता है कि मेने एक राष्ट्रीय सँगठन से अपने आप को जोडकर स्वयँ को गौरव प्रदान किया है,
जिस सँगठन मे सुषमा जी जैसी नेत्री जिन्होने अपने अँतिम श्वाँस तक राष्ट्र के बारे मेँ ही विचार किया,उस सँगठन का हिस्सा होना गौरव की बात है,
उनके अँतिम शब्द कि वो जीवन भर धारा 370 हटने का इँतजार करती रही और वो इसी हेतु जीवित रही, ये हम सभी के लिये प्रेरणा है कि जीवन पर्यँत निजी स्वार्थोँ से ऊपर उठकर राष्ट्र निमित्त चिँतन करना अपे व्यवहार मे कैसे शामिल हो,
अँतिम समय तक केवल राष्ट्र के लिये चिँतन करना
राजनीति मेँ एसे आदर्श बहुत कम होते है,,ये पँक्तियाँ एसी ही आदर्श राष्ट्र प्रेरणा के लिये है
“तन समर्पित मन समर्पित
और यह जीवन समर्पित”
आज राजनीति का एक और गौरवमयी अध्याय समाप्त हुआ,,वँदनीया सुषमा दी के चरणोँ कोटि कोटि नमन,,भावभीनी श्रद्धाँजलि,,,
शीतल भँडारी
भाजपा महिला मोर्चा
प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य
सँकल्प से सिद्धी
महिला विभाग शँयोजक
7.8.2019
11:27 am

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